उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति का उनकीे गणितीय अभियोग्यता पर प्रभाव
डाॅ. (श्रीमती) शोभा पुरकर1, श्रीमती शैलजा पवार2
1प्राध्यापक एव विभागाध्यक्ष, शिक्षा संकाय, कल्याण स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, सेक्टर-7,
भिलाई नगर, जिला दुर्ग (छ.ग.)
2सहायक प्राध्यापक, शिक्षा संकाय, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय, आमदी नगर,
हुडको, भिलाई, (छ.ग.)
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प्रस्तुत अध्ययन में उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति का उनकी गणितीय अभियोग्यता पर प्रभाव का अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन हेतु न्यादर्ष के रूप में दुर्ग, राजनांदगांव एवं बालोद जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के 500 (250 छात्र एवं 250 छात्राएँ) विद्यार्थियों का चयन उद्देष्यपूर्ण न्यादर्ष विधि द्वारा किया गया है। इस अध्ययन हेतु हेतु डाॅ. श्रीमती शैलजा भागवत द्वारा निर्मित वैज्ञानिक अभिवृत्ति स्केल ैठ.ै।ै (2012) का एवं गणितीय अभियोग्यता के मापन हेतु स्वनिर्मित उपकरण गणितीय अभियोग्यता परीक्षण ड।ज् (2017) का उपयोग किया गया है। अध्ययन का परिणाम यह दर्षाते है कि विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति, क्षेत्र, लिंग का उनकी गणितीय अभियोग्यता के प्राप्तांकों पर मुख्य एवं अंतःक्रियात्मक सार्थक प्रभाव नहीं पाया गया।
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प्रस्तावना
शिक्षा मानव विकास का मूल साधन है। जिसके द्वारा मनुष्य की जन्मजात् शक्तियों का विकास उसके ज्ञान एवं कला कौशल में वृद्धि तथा व्यवहार में परिवर्तन कर उसे सभ्य सुसंस्कृत एवं योग्य नागरिक बनाया जाता है, यह कार्य मनुष्य के जन्म से प्रारंभ होता है और बालक प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा एवं उच्च शिक्षा प्राप्त करके सुयोग्य नागरिक बनता है। किसी भी देश की प्रगति और समृद्धि उसके विज्ञान, गणित और तकनीकी के क्षेत्र के मापदण्ड से निर्धारित होती है। जो अपने युवाओं को दी जा रही शिक्षा का नतीजा है। विकसित देशों की उन्नति के लिए इस तथ्य ने पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए है।
वैज्ञानिक अभिवृत्ति विभिन्न विशेषताओं, जिज्ञासा, सृजनात्मक शक्ति, ईमानदारी, साहस, धर्म, खुली विचारधारा और संतुलित मन का योग है। जब किसी घटना परिस्थिति या समस्या का समाधान वैज्ञानिक आधार पर विचार करते हुए किया जाता है, तथा उसके लिए वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग अवलोकन एवं निष्कर्ष प्रयुक्त करते हैं तो उसे वैज्ञानिक अभिवृत्ति कहते हैं। आइजैंक (1972) ने सामान्यतः अभिवृत्ति को परिभाषित किसी वस्तु या समूह के संबंध में प्रत्यात्मक बाह्य उत्तेजनाओं की उपस्थिति में व्यक्ति की स्थिति और प्रत्युत्तर तत्परता के रूप में की जा सकती है, तो उसे वैज्ञानिक अभिवृत्ति कहते हैं।
फ्रीमेन के अनुसार ‘‘प्रवणता एक योग्यता या विशेषताओं का समूह है, जो यह संकेत करता है कि व्यक्ति किस विशेष ज्ञान, योग्यता या प्रतिक्रियाओं के समूह जैसे-भाषा बोलने की योग्यता, संगीतज्ञ बनने, यांत्रिक कार्य करने की योग्यता का विकास करना है। किसी व्यक्ति की गणित विषय के प्रति रूझान या झुकाव को गणितीय अभियोग्यता या गणितीय अभिक्षमता कहते हैं। बिंघम (ॅण्टण् ठपदहींउए 1952) के अनुसार, “विषिष्ट प्रषिक्षण में दिये गये कुछ ज्ञान या कौषल या प्रतिक्रियाओं (अनुक्रियाओं) के समुच्चय को अर्जित करने की किसी व्यक्ति की योग्यता को लक्षण के रूप में व्यक्त करने वाली विषेषता या दषाओं का समुच्चय ही अभिक्षमता है।
नायक एवं शर्मा (2013) ने शासकीय एवं निजी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति में सार्थक अंतर पाया गया। श्रीवास्तव एवं ताम्रकार (2014) ने अपने अध्ययन में पाया कि कक्षा दसवीं के सी.बी.एस.ई.बोर्ड एवं सी.जी. बोर्ड के विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिवृत्ति में सार्थक अंतर नहीं पाया गया। दोनों प्रकार के बोर्ड के छात्र एवं छात्राओं में पृथक-पृथक रूप से भी अभिवृत्ति में सार्थक अंतर नहीं पाया गया। सरधाना (2016) ने कुछ जनसांख्यिकीय चर के संबंध में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के बीच वैज्ञानिक अभिवृत्ति का अध्ययन किया। अध्ययन के परिणामों से पता चला कि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों में वैज्ञानिक अभिवृत्ति औसत है। वैज्ञानिक अभिवृत्ति पर स्कूल का प्रकार, सेक्स, प्रबंधन और स्थानीयता का कोई प्रभाव नहीं है। माली (2016) ने वैज्ञानिक अभिवृत्ति का अवबोधन अधिगम वातावरण, बुनियादी विज्ञान प्रक्रिया कौशल और वैज्ञानिक साक्षरता के साथ, संबंध खोजने के लिए एक अध्ययन किया। परिणामों से प्राप्त हुआ कि लड़के और लड़कियों के मामले में वैज्ञानिक अभिवृत्ति का अवबोधन अधिगम वातावरण, बुनियादी विज्ञान प्रक्रिया कौशल और वैज्ञानिक साक्षरता के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध है। एलिजाबेथ एवं सिंधु (2015) सेकेण्डरी स्कूल विद्यार्थियों के गणित में उपलब्धि पर माॅडल का सार्थक सकारात्मक प्रभाव होता है। साध (2015) ने अपने शोध हिमाचल प्रदेष के मांदि जिला में किषोर विद्यार्थियों द्वारा गणित अनुदेषन से सीखने की उपयोगिता का स्तर जानने के लिए किया था। निष्कर्ष में पाया गया कि गणित की उपयोगिता में छात्र एवं छात्राओं के बीच सार्थक अंतर नहीं पाया गया। लेकिन शासकीय एवं निजी विद्यालय में अध्ययनरत् विद्यार्थियों का ग्रामीण एवं शहरी विद्यालय में अध्ययनरत् विद्यार्थियों का निर्देषों के माध्यम का, गणित में उपयोगिता पर सार्थक प्रभाव पाया गया। राजकुमार (2015) ने गणित में माध्यमिक विद्यालय के छात्रों की सीखने की कठिनाइयों पर एक अध्ययन किया। हर किसी को अभियोग्यता की शक्ति, जैसे कि अमूर्तता, शब्दों के उपयोग में प्राथमिकताएं, तार्किक सोच और गणना के कौशल आदि की आवश्यकता होती है। किसी भी तर्क के बिना विषय को समझने के लिए भारी पाठ्यक्रम छात्रों की प्रमुख समस्याओं में से एक है। इसके अलावा, शिक्षकों को प्राथमिक गणित में अच्छा अभिविन्यास नहीं दिया जाता है। थमारसेरी और रहमान (2017) ने वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्रों के बीच गणित के लिए वरीयता को प्रभावित करने वाले लिंग कारकों पर एक अध्ययन किया। वर्तमान अध्ययन से पता चला है कि लड़के, लड़कियों की तुलना में उच्च माध्यमिक कक्षाओं में गणित के पाठ्यक्रम चुनते थे। सामाजिक प्रभावों और व्यक्तिगत विश्वास प्रणालियों के कारण महिलाओं ने उन गतिविधियों में भाग नहीं लिया जो उन्हें स्वतंत्र शिक्षार्थी गणित बनने में सक्षम बनाती हैं।
उद्देश्य:
विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति, क्षेत्र, लिंग का उनकी गणितीय अभियोग्यता के प्राप्तांकों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना।
परिकल्पना
भ्0 विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति, क्षेत्र, लिंग का उनकी गणितीय अभियोग्यता के प्राप्तांकों पर मुख्य एवं अंतःक्रियात्मक सार्थक प्रभाव नहीं पाया जायेगा।
न्यादर्ष
दुर्ग, राजनांदगांव एवं बालोद जिले के कुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में से 20 प्रतिषत विद्यालयों का चयन कर उनमें से 20 प्रतिषत ग्रामीण एवं 20 प्रतिषत शहरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों का चयन किया गया है।
शोध उपकरण
प्रस्तुत अध्ययन में विद्यार्थियों के वैज्ञानिक अभिवृत्ति के मापन हेतु डाॅ. श्रीमती शैलजा भागवत द्वारा निर्मित वैज्ञानिक अभिवृत्ति स्केल ैठ.ै।ै (2012) का एवं गणितीय अभियोग्यता के मापन हेतु श्रीमती शैलजा पवार, डाॅ. श्रीमती शोभा पुरकर द्वारा स्वनिर्मित उपकरण गणितीय अभियोग्यता परीक्षण ड।ज् (2017) का उपयोग किया गया है।
सांख्यिकीय विष्लेषण
अंतःक्रियात्मक परिकल्पना की जाँच हेतु (2ग्2ग्2) फेक्टोरियल डिजाइन प्रसरण, विष्लेषण का उपयोग किया गया।
परिणाम एवं निष्कर्ष
विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति, क्षेत्र, लिंग का उनकी गणितीय अभियोग्यता के प्राप्तांकों पर मुख्य एवं अंतःक्रियात्मक सार्थक प्रभाव नहीं पाया गया अर्थात् 0.01, 0.05 सार्थकता स्तर पर सार्थक अंतर नहीं पाया गया, इसलिए शून्य परिकल्पना स्वीकृत हुई। अर्थात् विद्यार्थियों की वैज्ञानिक अभिवृत्ति का उनकी गणितीय अभियोग्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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Received on 19.10.2018 Modified on 19.11.2018
Accepted on 16.02.2019 © A&V Publications All right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(1):277-280.